गर्मी की छुट्टी-उपासना

कमलेश द्विवेदी कहानी प्रतियोगिता -01

इकलौते बेटे के सिंगापुर बस जाने के बाद सुमित्रा ताई और अशोक जी इंदौर में अकेले पड गए थे। प्रतिदिन मंदिर जाना, सुबह-शाम घूमना और फिर बालकनी में बैठकर बाहर देखना इस तरह अपना टाइम पास किया करते थे। गर्मी की छुट्टियों में दादी-नानी के आए आस पड़ोस के नौनिहालों को देख कर सुमित्रा ताई को अच्छा लगता पर उन्हें लगातार मोबाइल में लगा पाकर उनका मन द्रवित हो उठता। शाम को घूमते हुए अशोक जी ने कहा “सुमी क्यों ना हम गर्मी की छुट्टियों में बच्चों के लिए कुछ एक्टिविटी क्लासेज शुरू करें। बच्चों को मोबाइल से छुटकारा मिलेगा और तुम्हें दादी-नानी वाला अहसास।”
“हां लेकिन हमारे फ्लैट में इतनी जगह कहां है?”
“वो बगल वाला डॉक्टर साब का फ्लैट खाली ही तो पड़ा है। मैं उनसे बात करता हूं।”
“आपने तो मेरे मन की बात कह दी। ये आइडिया पहले नही दे सकते थे क्या?” कहते हुए ताई ने आंखे तरेरी।
रात में बैठ कर दोनो ने सोसाइटी के वाट्स ऐप ग्रुप पर मैसेज डाल दिया।

“छुट्टियों के रंग, दादा दादी के संग”
सभी प्यारे बच्चों के लिए गर्मियों का तोहफा
शाम 4 से 7 बजे तक, प्रतिदिन
योगा, भजन, अच्छी आदतें
पौराणिक कथाएं और महापुरुषों की कहानियां
वेस्ट से बेस्ट बनाना और भी बहुत कुछ
फीस: एक डायरी और पेन

बस फिर क्या था रात दस बजे तक ताई को पंद्रह बच्चों के नाम आ चुके थे।
“हम बच्चों को जरूरत के छुटपुट काम जैसे चाय बनाना, बटन लगाना, गिफ्ट पैक करना, दुकान से सामान लेते वक्त एक्सपायरी डेट, एमआरपी देखना ये सब भी सिखाएंगे।” अशोक जी ने कहा।
“आपने बहुत अच्छा सोचा है याद है पिछले ही साल एक्सपायरी डेट का जूस पीने से शुभी की मम्मी की जान पर ही बन आई थी।”
“चलो अब सोते हैं बाकी तैयारियां सुबह करेंगे।” कहते हुए सुमित्रा जी भी लेट गई पर नींद तो जैसे उनकी आंखों से कोसों दूर थी।ऐसा लग रहा था मानो समय का पहिया 35-40 साल पीछे चला गया हो।
भोर की किरण सुमित्रा ताई के लिए एक नई खुशी लेकर आई थी। बस फिर क्या था अशोक जी और ताई मार्केट से झटपट बहुत सी किताबें और बच्चों के फेवरेट कलर्स और पेपर लेकर आए।
दोपहर से ही बच्चों के मम्मी पापा के फोन आने शुरू हो गए थे। पहले दिन दादा-दादी ने बच्चों को सूर्य नमस्कार करना सिखाया और कान्हा की बाल लीलाएं भी सुनाई। फिर लास्ट में घर का बना आम पापड़ खिलाया और साथ में एक हिदायत भी दी कि जो भी आप सीखते हो प्रतिदिन सोने से पहले उसे अपनी डायरी में लिखना ना भूलना।
बच्चे तो खुश थे ही मम्मी पापा भी बड़े खुश थे की इस बार गर्मी की छुट्टियों में बच्चे सचमुच कुछ नया और अच्छा सीख रहे हैं।
दादी के कैंप के अंतिम दिन सोसाइटी के बच्चे दादा-दादी के लिए बहुत से गिफ्ट लेकर आए और सभी गिफ्ट उनके नन्हें हाथों से बनाए हुए थे। जिन्हें देखकर दादा-दादी फूले नहीं समा रहे थे।
सचमुच इस बार गर्मी की छुट्टियों का रंग ही अलग था।

उपासना गुप्ता
344, श्री मंगल नगर,
बिचौली हप्सी रोड,
इंदौर(म.प्र.)

9785718225

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