लेखन प्रतियोगिता में शीला श्रीवास्तव की कहानी सावन में मायका

सावन का महीना वर्षा की रिमझिम बूंदों को निहारते हुए रंजना अपनी बालकनी में उदास खड़ी है!
सावन का महीना लगते ही”मायके”की याद क्यों आने लगती है?

यही सोचते सोचते उसका मन अतीत के गलियारे से गुजरने लगा।

सावन लगते ही माँ, पिता जी के फोन आने लगते थे, बेटा राखी पर जरूर आ जाना तुम्हारा इकलौता भाई भी राखी पर घर आने वाला है!
अब कहां है इकलौता भाई?

माँ, पिता जी कोरोना में चल बसे! और भाई को भी विदेश की बढ़िया कंपनी में नौकरी लग गई।
मै अपने पति और बच्चों के साथ भारत में ही रह रही हूं! मेरे पति भी अच्छी कंपनी में ऊंची पोस्ट पर है। अच्छा वेतन मिलता है हमारे सारे खर्चे उनकी तनख्वाह से पूरे हो जाते हैं।
“मेरे बच्चे भी अच्छी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं “
तो मुझे लगता है कि अपने देश में अपने लोगों के साथ रहने में जो अपनापन मिलता है! क्या विदेश में मिलता होगा।
“हम तो वहाँ विदेशी कहलाएंगे”
हमे जो अपनी भारतीय संस्कृति है उससे जुड़े रहने में लगता है हम अपनी मिट्टी से जुड़े हैं।
फिर लोगों में विदेश में रहने का क्या जुनून है?

जब मैंने पूछा था भैया राखी पर तो आया करोगे?
तो उसने कहा था ऐसा तो संभव नहीं है! वहां से आने में खर्चा भी बहुत होता है। और तुम्हारी भाभी को भी तो अपना मायका छोड़ना पड़ा है।
तुम मेरी इकलौती बहन हो तुमसे दूर जाने का मुझे भी दुख है।
पर तुम सोचो 60 लाख का पैकेज मिलेगा तो उसको छोड़ना भी तो अगल मंदी नहीं है?
रंजना चुप हो गई थी!अब वह भावना कहां रह गई।
वो तो माँ, पिता के साथ ही चली गई सही कहते हैं जब तक माता-पिता रहते हैं तभी तक मायका होता है।
मेरा मायका तो विदेशी हो गया!

डोर बेल बजी रंजना की तंत्रा भंग हुई, झट से दरवाजा खोला अरे “राकेश भैया आप”सब ठीक है न?

राकेश कहने लगे दरवाजे पर ही बात करेगी या अंदर आने को भी कहेगी! मानता हूं कि मैं अमित का दोस्त हूं, पर तेराभाई ही हूं न?
“हां हां भैया”
राकेश अंदर आया और बोला मुझे माँ ने तुझे लेने के लिए भेजा है! कह रही थी कि सावन लगते ही बेटियों को “मायके की यादआना स्वाभाविक है”।
जाओ रंजना को लिवा लाओ वह वहां दुखी हो रही होगी!
माता-पिता के जाने के बाद भाई का घर ही मायका कहलाता है। तू उसका भी भाई ही है! क्योंकि तुम उसके भाई के दोस्त हो दोस्त का रिश्ता बहन के लिए भाई के समान होता है।
उसका भाई तो विदेशी होकर रह गया?
पर तुम भी तो उसके भाई हो यह फर्ज तुम पूरा करो।
रंजना एकदम अस मंनजस में पड़ गई दोनों आंखों के मोती लुढ़क पड़े ! सच में जो दिल से बहन की भावना को समझता हो वह सगे भाई सेभी बढ़कर हो जाता है।

रंजना बोली आपने पहले कुछ बताया नहीं!
मैं इतनी जल्दी कैसे चल सकती हूं?

तभी रंजना के पति रवि बोले राकेश भैया से मेरी पहले बात हो चुकी है उन्होंने मुझे बताया था कि मेरी माँ रंजना को बहुत प्यार करती हैं!
कहती है सावन में हर बेटी को अपने मायके जाने का एक शौक रहता है और इस बहाने उनको मायके का सुख मिल जाता है।
रक्षाबंधन पर भाई की कलाई में राखी बांधने का अवसर मिल जाता है! भाई बहन के प्यार में गहराई आती है।
विदेशी संस्कृति लोगों के सर पर चढ़कर बोलने लगी है और राखी बांधने की औपचारिकता मोबाइल द्वारा निभा ली जाती है।
बहन को सच्चा सुख हाथ से राखी बांधने में जो मिलता है! उसको एक बहन ही समझ सकती है।
इस लिए मुझे मम्मी ने तुमको लेने भेजा है।
रवि बोले रंजना ऐसे माता-पिता भाई दुनिया में अभी भी है यह मैं समझ सकता हूं।
तुम खुशी से राकेश भैया के साथ चली जाओ मैं तुम्हें राखी के बाद जमाई की हैसियत से लेने आऊंगा।
क्यों भैया ठीक कह रहा हूं ना?
राकेश बोले रवि जी आप सही कह रहे हैं आपने मेरे मन की बात कर दी! अगर आप आए तो माता-पिता जी को बहुत खुशी मिलेगी और हमारा रिश्ता एक मजबूत रिश्ता बन जाएगा।
रंजना को राकेश की बातें सुन कर आश्चर्य भी हुआ और सोचने लगी कौन कहता है कि मेरा मायका भारत में नहीं है।

रवि बोले रंजनातुम अपनी तैयारी कर लो यहां की चिंता मत करो मैं यहां कैंटीन में खाना खा लिया करूंगा। बच्चों को रक्षाबंधन पर ज्यादा छुट्टी नहीं मिली है उनका मैसेज आया था कि इस बार दोनों घर नहीं आ पायेंगे। दोनों एक ही शहर में है वही रक्षाबंधन मना लेंगे! हम लोग चिंता ना करें।

तुम राकेश भाईसाहब के संग जाओ “ऐसा मायका किस्मत वालों को मिलता है”
रंजना की आंखों से मोती टपक गये।

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