लेखन प्रतियोगिता में रश्मि गुप्ता की कहानी

जिंदगी कैसी है पहेली हाय

मैंम ने कॉल किया – अंजू ! आपका और आपके मां,पिताजी तीनों के आधार कार्ड की फोटोकॉपी चाहिए। दसवीं बोर्ड की परीक्षा समाप्त हुए अभी दो दिन ही हुए थे। मार्च का महीना फिर भी धूप और गर्मी मई जून के जैसे।
मैम ने कॉल करके फोन रखा और अपने काम में बिजी हो गई।
लगभग एक घंटे बाद अंजू स्कूल आई। उसे देखकर मैम चौंकी। खुश होते हुए बोली – अरे! अंजू तुम इतनी धूप में तुरंत ही आ गई बेटा।
अंजू खुश होकर बोली – जी मैम!
मैम ने कहा – देखो। तुम्हारी परीक्षा खत्म हो गई मगर हमारा काम अभी तक खत्म नहीं हुआ।
मैम ने पूछा – और बताओ अभी छुट्टियों में क्या कर रही हो?
अंजू बोली – मैम! मेरी दीदी आई है, मैं उन्हीं के साथ दिन भर लगी रहती हूं। खुश हूं अपनी दीदी के साथ।
उसने कहा – अभी मैं उन्हीं के साथ आई हूं। आप मेरी दीदी से मिलना चाहेंगी ?
मैम ने कहा – जरूर क्यों नहीं ?
उसने तुरंत अपनी दीदी को बुलाया।
एक पतली दुबली सी बहुत कम उम्र की सुंदर लड़की सिंदूर लगाई हुई मैम के सामने खड़ी थी।
मैम ने कहा- अरे ! दीदी की शादी हो गई ?
उसने कहा – हां मैम । हरियाणा से आई है।
मैम को जानने की उत्सुकता हुई। मैम ने कहा – बैठिए।
दोनों सकुचाते हुए बैठे।
मैम ने पूछा – क्या नाम है दीदी का ?
अंजू ने बताया अंजली।
मैम ने पूछा – कितनी बड़ी हैं आप अंजू से ? उसने कहा – अधिक नहीं मैम बस दो साल।
मैम ने कहा – तब तो आपका बाल विवाह हुआ है।
उसने हस कर कहा – मैम! हुआ था बट अभी मैं बालिग हो चुकी हूं। खूब चंचल सी लड़की बीच-बीच में अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करती हुई खूब खुशी और उमंग से भरी हुई लग रही थी।
मैम ने पूछा – कैसा बना अंजू पेपर ? पास तो हो जाओगी न ?
अंजली कहने लगी – मैम मुझे आए करीब 15 दिन से अधिक हो गए बट मैने कभी इसे रिवीजन करते नहीं देखा।
मैम ने कहा – अच्छा ?
अंजली कहने लगी – मैम इसे रिवीजन की जरूरत नहीं पड़ती। इसे सब कुछ एक बार में ही याद हो जाता है।
मैम ने कहा – अच्छा !
अंजली कहने लगी – हां मैम! मुझे आश्चर्य होता है , ये रिविजन क्यों नहीं करती ?
मैम ने कहा – तुम्हे पता है ? अंजू आज तक कक्षा दसवीं, के जितने भी पेपर हुए हैं, उन सब में फेल है ?
अंजू ने तपाक से कहा – मैम मेरी तबियत ठीक नहीं रहती इसलिए।
मैम ने कहा – हां। जब भी पूछो स्कूल क्यों नहीं आती तो यही कहती हैं कि तबियत ठीक नहीं है। आखिर इसे क्या हुआ है ?
अंजली कहने लगी – मैम! ये दिन में एक बार ही खाना खाती है। ऐसे में कैसे चलेगा?
मैंम ने पूछा – क्यों अंजू ?
अंजू बोली – मैम ! मुझे भूख ही नहीं लगती। अभी कुछ दिनों पहले मुझे खून चढ़ाना पड़ा।
मैम ने कहा – बेटा ? जब तुम्हे पता है कि तुम्हारे शरीर में खून की कमी है तो खून बढ़ाने वाली सब्जी, फल खाया करो।
अंजू कहने लगी- पता नहीं मैम! मैं जब से यहां आई हूं। मेरी तबियत को क्या हो गया है ?
मैम ने पूछा – हां । पहले तुम राजस्थान में पढ़ती थी न?
अंजली कहने लगी – हां मैम! पहले हम लोग राजस्थान में रहते थे। पापा पुणे में इंजीनियर थे। हम दोनों बहन इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ते थे। पापा के देहांत के बाद मां ने बड़ी मुश्किल से मुझे दसवीं तक पढ़ाया फिर मेरी शादी कर दी।
मैम चौकी? अरे ! अंजू इंग्लिश मीडियम से हिंदी मीडियम में आई है।
बाजू में बैठी मैम कहने लगी – हां। तभी तो ये सिर्फ इंग्लिश में पास होती हैं। आप दसवीं में इसके क्लास टीचर बने हैं। ये 9th में आई थी इसलिए आपको पता नहीं है।
मैम को सारा कनेक्शन अजीब सा लगने लगा।
कहां पुणे, कहां राजस्थान, कहां हरियाणा फिर कहां छत्तीसगढ़ । फिर इंग्लिश मीडियम से हिंदी मीडियम।
मैम ने दोनों बहनों में भी काफी अंतर देखा। अंजली बहुत चंचल, अंजू बहुत सुस्त। शरीर से अंजली बहुत पतली अंजू थोड़ी ठीक लग रही थी पर अंजू की तबियत बहुत खराब और अंजली बहुत स्वस्थ ?
मैम की जिज्ञासा बढ़ने लगी।
मैम अंजू को समझाने लगी- अंजू तुम्हारी दीदी इस उम्र में सारा घर संभाल रही है और तुम स्वयं को नहीं संभाल पा रही हो?
अंजू घबराने लगी। मैम ने पानी का बॉटल दिया कहा – लो पानी पियो। आराम से बैठो और मुझे पूरी बातें बताओ।
अंजू घबराहट में कुछ भी नहीं बोल पा रही थी।
अंजली बातों को घुमाने लगी – कहने लगी मैम मेरे ससुराल के लोग बहुत अच्छे हैं। मै अच्छे घर की बहू हूं।
मैम ने पूछा – दामाद जी क्या करते हैं ?
अंजली ने बताया – घाघरा चुन्नी का बहुत बड़ा शॉप है हरियाणा में।
वो अपनी शादी की फोटो दिखाने लगी। उसने अपनी सासु मां अपनी ननद अपने घर का फोटो दिखाया।
मैम ने कहा – अरे वाह! तुम तो बड़ी प्यारी लग रही हो।
अंजली तुमने दामाद जी का फोटो नहीं दिखाया?
अंजली ने सकुचाते हुए खूब ढूंढकर एक दो फोटो दिखाए।
मैम को बड़ा आश्चर्य हुआ । मैम ने पूछा – अंजली आपसे कितने बड़े हैं दामाद जी ?
अंजली कहने लगी – मैम वो तो अभी 30 साल से ऊपर हैं।
मैम अवाक हो गई। मैम ने कहा – अंजली तुमने शादी से मना नहीं किया ?
अंजली कहने लगी – मैम! मेरी और मां की मजबूरी थी।
मैम ने कहा – अंजली मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।
तुम आराम से मुझे सारी बातें बताओ।
अंजली कहने लगी – मैम! जब मैं दो वर्ष की थी, मेरे पापा नहीं रहे। मां कहती है कि उन्हें जादू टोने ने खा लिया।
मुझे मां ने बड़ी मुश्किल से दसवीं तक पढ़ाया। फिर मेरी शादी कर देना उचित समझी। मैने भी मां की मजबूरियों को देखते हुए शादी के लिए हा कर दी।
अब मेरी मां और अंजू दोनों यहां रहते हैं। मै हरियाणा से एक महीने के लिए यहां बहुत दिनों के बाद आई हूं। इसलिए मुझे यहां के बारे में अधिक नहीं पता। मैम ने पूछा – घर का खर्च कैसे चलता है ?
अंजू ने कहा – मां होटल में काम करती है।
मैम ने आह भरकर पूछा – क्या काम करती है ?
अंजली ने सकुचाते हुए कहा – बर्तन धोती है।
मैम को समझते देर नहीं लगी – मैम ने पूछा- मां ने प्रेम विवाह किया था?
अंजली बोली – जी।
उफ्फ किस्मत भी कैसे – कैसे खेल करवाती है ?
कहां मां ने प्रेम विवाह किया इंजीनियर से जो पुणे में रहते थे। मां का ससुराल था राजस्थान जहां उन्हें अधिक दिन नहीं रख सके। बेटी की शादी हरियाणा जाकर मां ने की जहां वो कमाने खाने गई थी।
अब यहां छत्तीसगढ़ कैसे आई ? मैम ने पूछा –
अंजू ने कहा – हमारे मामा यहां रहते थे।
मैम को अब अंजू के बारे में कुछ भी पूछने की जरूरत नहीं थी।
अंजू बोलती जा रही थी – मैम ! जब मैं राजस्थान में थी तब मेरी तबियत बहुत अच्छी थी , यही आकर मुझे कुछ हो गया।
मैम ने अंजू से कहा – अंजू मै एक आखिरी बात तुमसे कहना चाहती हूं…
तुम शरीर से नहीं मन से अस्वस्थ हो। देखो तुम्हारी मां ने कितना संघर्ष किया। कहां वो पुणे में रही, फिर राजस्थान में, फिर हरियाणा में, अभी वो यहां है। तुम्हारी बहन को हरियाणा में शादी करनी पड़ी। उसके बाद हरियाणा में कैसे रहना है , कैसे जीवन जीना है ये तुम्हारी बहन पर निर्भर करता है। उसने अपने आप को वहां के माहौल के अनुरूप ढाल लिया है अब वो खुश है। मां भी इतने जगह रही मां ने कोई शिकायत नहीं की। बेटा! ईश्वर ने हमे अपने मन को संचालित करने के सारे पावर हमारे हाथों में दिए हैं। ड्राइवर की सीट पर हमारे मन को बैठा दिया है। अब तुम अपना जीवन जैसा बनाना चाहती हो ये तुम्हारे मन की शक्ति पर निर्भर है। तुम जैसा सोचोगी तुम्हारा जीवन वैसा ही बनता चला जाएगा।
अब तुम ये सोचना बंद कर दो कि तुम्हे यहां आने के बाद कुछ हो गया है।
अंजली ने कहा पापा जादू टोने के शिकार हो गए।
मुझे इतना पता है कि अगर तुम मन से मजबूत हो तो तुम्हारे ऊपर कोई भी जादू टोना तंत्र मंत्र काम नहीं करेगा और अगर तुम मन से कमजोर हो तो तुम अपनी ही परछाई से डर जाओगी। जिंदगी में बहुत से उतार चढ़ाव आते है। अगर तुम्हे खुश रहना है तो सब से सामंजस्य बिठाना तुम्हे सीखना पड़ेगा।
शायद दोनों बहनों ने मैम की बातों को आत्मसात कर लिया था। अंजू के चेहरे पर गजब की मुस्कान और एक आत्मविश्वास दिखाई दे रहा था।
दोनों ने कहा मैंम । आप बिल्कुल सही कह रहे हैं।
अंजली कहने लगी – मैम मैं कब से आपसे मिलना चाहती थी। आज मिलना हुआ आपसे । नाइस टू मीट यू मैम!
दोनों बच्चियां बहुत ही खुश होकर अपने घर को गईं। मैम को इस बात की तसल्ली थी कि शायद अंजू उनकी बातों को जीवन में अपना ले और अपने आपको मानसिक कमजोरियों के बंधन से आजाद करके उन्नति के पथ पर अग्रसर करने में सफल हो जाए। कहते हैं न -” मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।”
मैम ने एक गहरी सांस ली। उनके मन में एक पंक्ति उभर आई – जिंदगी कैसी है पहेली हाय, कभी तो हंसाए,कभी ये रुलाए…….
मैम को लगा कि अगर आज मैं इस बच्ची को बुलाती नहीं तो मुझे इस बात का अहसास ही नहीं होता कि छोटे छोटे बच्चे भी जिंदगी की उथल – पुथल से कितने परेशान होते हैं। जब तक हम उनकी निजी जिंदगी से अवगत नहीं होंगे शायद हम समझ ही नहीं पाएंगे कि उन्हें क्या परेशानी है।
बच्चों की परेशानियों को समझे बिना उन्हें उन्नति के पथ पर अग्रसर करने की बातें बड़ी असंभव सी प्रतीत होती है।
रचनाकार
रश्मि रामेश्वर गुप्ता बिलासपुर छत्तीसगढ़
E-mail -rashmirameshwarguptapoet@gmail.com

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