लेखन प्रतियोगिता में रश्मि वैभव गर्ग की कहानी काँची

कांची….नाम था उसका…आज मैं बाहर धूप में बैठकर बाल सूखा रही थी ,तो अचानक दर्पण में अपने बालों में आई चाँदी दिखी,तो ख़्याल आया कि इन्हीं बालों पर मोहित थी न वो।कहती थी तुम्हारी आँखें और बाल बहुत ख़ूबसूरत हैं ।
सोचते सोचते कब अतीत में पहुँच गई पता ही नहीं चला ।

कांची…कॉलेज में नया ही दाखिला हुआ था उसका । सहमी सी एक कोने में बैठी मुझे बार बार देखा करती थी । एक दिन मैंने उससे पूछा ,तुम नई आई हो ..इस शहर में?
उसने हाँ में जवाब देते हुए कहा, मेरे पापा का अभी यहाँ स्थानांतरण हुआ है ,इसलिए मैंने लेट एडमिशन लिया है । मैंने औपचारिकता वश कहा ,तुम्हें कोई नोट्स वगैरह चाहिए तो मुझसे ले लेना ।
उसने कहा ठीक है ..फिर वह बोली ,तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो ।
तारीफ़ सुनकर मेरा मन खुश हो गया । बात आगे बढ़ी ,उसने कहा मैं तुम्हें ही देखती रहती हूँ । मेरा मन और ज़्यादा ख़ुश हो गया । तारीफ़ से प्रसन्न मेरा हृदय ,उसको मूक धन्यवाद देने लगा ।
अगले दिन फिर वह मेरे पास आई और मुझसे नोट्स मांगने लगी, मैंने भी उसे ख़ुशी ख़ुशी नोट्स दे दिए।
धीरे धीरे उसका यही क्रम बन गया , वो रोज़ मेरे पास आने का बहाना ढूँढने लगी । शुरुआती समय में तो मुझे उससे बात करना अच्छा लगता था ,लेकिन धीरे धीरे मेरे लिए वो बोर होने लग गई थी।
कॉलेज में प्रवेश के साथ अकेला शैक्षणिक प्रवेश नहीं होता है, आँखों में सतरंगी सपनों का भी प्रवेश होता है, जीवन की सच्चाई से दूर एक ख़्वाबों की दुनियाँ होती है ,जिसमें हर तरह के सपने आँखों में सजे होते हैं । ऐसा ही मेरे साथ था ,मेरा भी महाविद्यालय में प्रथम वर्ष ही था, तो मैं भी सतरंगी दुनियाँ से वाक़िफ़ होना चाहती थी ।कांची उसमें मेरे लिए व्यवधान बनती जा रही थी । वो मेरे साथ अधिकतम समय गुज़ारना चाहती थी और मैं उसके साथ न्यूनतम समय । लोग हम दोनों को मज़ाक में लव बर्ड्स कहने लग गए थे ,जो कि मुझे कतई पसंद नहीं था ।
उसकी इस आदत से तंग आकर ,मैंने दूसरे कॉलेज में दाखिला ले लिया । मेरा ऐसा करने से हम दोनों ज़्यादा ही सुर्खियों में आ गए ।
एक दिन मेरे पास मेरी सहेली का फ़ोन आया कि, कांची तुमसे मिलना चाहती है ,लेकिन मैंने मिलने से साफ़ इंकार कर दिया ।
नए कॉलेज में मुझे कुछ सुकून मिला और मैं अपनी कॉलेज लाइफ को जीने लगी थी ।

एक दिन अचानक वो मुझे मेरे नए कॉलेज में दिखी, देखकर मैं दंग रह गई, मैंने उससे आँख चुराते हुए उसे नज़रअंदाज़ करना चाहा ,लेकिन वो कहाँ मानने वाली थी ,मेरे पास आई और बोली मुझे तुमसे प्यार हो गया । तुम्हारी आँखे और बाल मुझे बहुत पसंद हैं । तुम मुझसे दूर क्यों भागती हो ?
मैंने उससे कहा ,कैसी बकवास करती हो तुम? प्यार करना है तो किसी लड़के से करो । मुझे ,मेरी कॉलेज लाइफ एंजॉय करने दो ,और तुम ख़ुद भी किसी लड़के से प्यार व्यार करो ,मुझसे नहीं …मैंने गुस्से से कहा ।इस कॉलेज में तुम्हारा नाम मेरे साथ जुड़ा तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा ।
वो रोने लगी ..कहने लगी ऐसे मत कहो.. मैंने तुम्हारी खातिर ही इस कॉलेज में प्रवेश लिया है .. मुझे तुमसे प्यार हो गया ।तुम इतनी निष्ठुर कैसे हो सकती हो ? क्या तुम्हें मेरे प्यार की जरा भी कद्र नहीं?
मैंने उसकी बात को अनसुनी करते हुए अपने घर का रुख़ कर लिया ।
थोड़े दिनों तक हम दोनों के बीच कोई संवाद नहीं हुआ । मुझे लगा मेरी डाँट का असर है ,और मैं नए कॉलेज के रंगीले माहौल में रचने , बसने लग गई ।
एक दिन मेरी एक सहेली ने मुझे एक लिफ़ाफ़ा दिया, कहा कांची ने तुन्हें देने के लिए कहा है ।
घर आकर मैंने वो लिफ़ाफ़ा खोला ,तो ख़ून से आई लव यू लिखा हुआ था ।
मैं दंग रह गई.. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए । मैं उसकी खामोशी को पहली बार समझ पाई थी । भावों का सैलाब तटबंध तोड़कर ,जो मुझ तक पहुँचा था , वो मुझे अंदर तक भिगो गया था ।
मुझे कांची से लेशमात्र भी लगाव नहीं था ,लेकिन मेरे अंदर का ज़मीर उसे नज़रअंदाज़ भी नहीं कर पा रहा था । मैंने कांची से मिलना उचित समझा, सोचा उससे कहूँगी कि तुम्हारा और मेरा मिलन कैसे संभव है? हम दोनों प्रकृति से समलिंगी हैं । ये तुम्हारा आकर्षण हो सकता है , मेरा नहीं । तुम अपनी भावनाओं को नियंत्रित करो और कोई मेल फ्रेंड बना लो ।
योजनानुसार अगले दिन मैंने कांची को बुलाया और शाम को उसे किसी रेस्टोरेंट में मिलने के लिए आमंत्रित किया। उसके चेहरे पर असीम ख़ुशी रेखांकित हो गई, मानो कोई प्रेयसी अपने प्रियतम से मिलने वाली हो ।
तय समय पर मैं रेस्टोरेंट पहुँची कांची मेरा इंतज़ार कर रही थी । उसका मासूम चेहरा मानो अनेकों अनुत्तरित प्रश्नों का जवाब दे रहा था । वो उस पल को जीना चाहती थी, उसका पूरा ध्यान उन लम्हों के जीने पर था ।
मैंने उसे प्यार से समझाया, देखो कांची …तुम्हारा और मेरा कोई मिलन नहीं, हम दोनों सिर्फ़ अच्छे दोस्त बन सकते है, लेकिन ये प्यार व्यार कुछ नहीं ।
उसके चेहरे की रंगत उड़ने लगी थी, मानो किसी नवविवाहिता का अपने प्रिय से मिलन होते होते रह गया हो ।
वो मेरे लिए एक कीमती परफ्यूम तोहफ़े में लाई थी । मेरे लाख मना करने पर भी उसने मुझे वो परफ्यूम दिया ।
मैंने कहा, आज से हम दोनों सिर्फ़ अच्छे दोस्त हैं और कुछ नहीं । प्यार के लिए तुम कोई बॉयफ्रेंड क्यों नहीं बना लेतीं? सुंदर हो कोई भी तुम्हारा दोस्त बन जाएगा।
वो मुस्कुरा दी और बोली ,मुझे तो आप बहुत पसंद हो ।
उसके बाद हम दोनों ,अपने अपने घर आ गए ।
मैंने भी उसके चेहरे के भावों को पढ़ लिया था, वो अपने प्यार पर अटल थी ।

कुछ दिनों तक मेरी और कांची की मुलाक़ात नहीं हुई, मुझे लगा काँची , दायरे में रहना सीख गई है और शायद उसने भी कोई मेल फ्रेंड बना लिया होगा ।
कुछ समय बाद कॉलेज में एक दिन ऐसी खबर आई कि ,मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई । खबर थी कि ,कांची की करंट लगने से मृत्यु हो गई है। कहा जा रहा था कि मृत्यु का कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है ,बाथरूम में करंट से झुलसी हुई मृत देह मिली है । मुझमें काटो तो खून नहीं ।ऐसा लग रहा था कि कहीं कांची ने आत्मदाह तो नहीं किया? उसकी संदिग्ध मृत्यु ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया था । मुझे उसका वो मासूम चेहरा और उसके शब्द याद आ रहे थे , कि तुम मुझे बहुत पसंद हो । मेरा हृदय चीत्कार कर रहा था ,कि कांची तुमने ये क्या किया ।
तुन्हें मैंने समझाया भी तो था । कांची की मृत्यु के बोझ तले मैं स्वयं अवसाद ग्रस्त हो गई थी,जिससे उभरने में मुझे ख़ासा वक्त लगा था ।
मुझे कांची की मृत्यु को स्वीकारने में ,जब भी एक अरसा लग गया था , और उसकी मृत्यु मेरे लिए आज भी एक रहस्य ही है, लेकिन कुछ रहस्य जीवन के कभी भी अनावृत्त
नहीं होते।

आज बालों में आई चाँदी ने कांची की याद दिला दी, साथ ही मन सोचने लगा कि कांची… तुम्हारे इस प्यार को क्या नाम दूँ ! उसका दिया हुआ परफ्यूम आज भी उसकी यादों को महका देता है ।
कांची …तुम मेरे जीवन का पहला प्यार थीं, चाहे एकतरफ़ा ही सही, और मैं तुम्हारे जीवन का पहला और आख़िरी प्यार थी शायद!
समाप्त

स्वरचित
रश्मि वैभव गर्ग
कोटा

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